दिनांक १५/०६/१९७९ को डॉ. जगन्नाथ मिश्र संस्कृत महाविधालय की स्थापना हुई | यह महाविधालय बिहार राज्य के मधुबनी जिलान्तर्गत अंधराठाढ़ी से ३ किलोमीटर पश्चिम पस्टन नवटोली नामक स्थान पर स्थित है | २४ सितम्बर १९८१ को इस महाविधालय का सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट २१,१८६ के अधीन निबंधन हुआ |

 

सन १९८०-८१ से १९८१-८२ तक महाविधालय का अस्थायी सम्बंधन रहा | अस्थायी सम्बंधन के पश्चात राज्य सरकार ने विश्वविधालय (कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविधालय) की अनुशंसा के आलोक में महाविधालय का पूर्व सम्बंधन का सत्र ८५-८६ से ९३-९४ तक दिर्घीकरण करते हुए ९४-९५ से स्थायी सम्बंधन प्रदान की |

 

प्रथम चरण में १० शिक्षक २ शिक्षकेत्तर एवं २ चतुर्थ वर्गीय कर्मियों के साथ महाविधालय की किर्याकलाप चलता रहा | कार्य की अधिकता एवं छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण सरकार ने ९ शिक्षक , ९ शिक्षकेत्तर एवं १३ चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के पद वितरहित स्वीकृत किये |

फरवरी २००० में इस महाविधालय को विश्वविधालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) की धारा 2(F) और 12(B) के अंतर्गत शामिल किया गया | फलस्वरूप आज इस महाविधालय को यु जी सी (U.G.C) के द्वारा दिए गये सभी अनुदान उपलब्ध है |

वर्तमान में महाविधालय के पास ३.५ एकड़ जमीन है | जिसमे २६ पक्के कमरे, ३ शौचालय, ३ चापाकल है | महाविधालय के पास एक वृहद पुस्तकालय है जिसमे प्रत्येक विभाग से सम्बंधित हजारों पुस्तकें हैं | आधुनिक तकनीक से युक्त महाविधालय में कम्प्यूटर, फोटोस्टेट मशीन, फेक्स मशीन, प्रोजेक्टर, कैमरा, टेलीविजन, जनरेटर, सौर उर्जा , छात्रावास इत्यादि उपलब्ध है |

यह महाविधालय स्थायी सम्बंधन प्राप्त वित्तसहित डिग्री स्तरीय महाविधालय है | यहाँ शास्त्री स्तर तक की (सामान्य एवं प्रतिष्ठा) वर्ग की पढाई होती है |

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